Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.77.10-11h: बुद्धिनल ने भी अनेक युक्तियों से उनसे क्षमा मांगी। नल से आदर पाकर श्रेष्ठ वक्ता और दार्शनिक राजा ऋतुपर्ण ने मुस्कुराते हुए कहा- ॥10 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.77: नलके प्रकट होनेपर विदर्भनगरमें महान् उत्सवका आयोजन, ऋतुपर्णके साथ नलका वार्तालाप और ऋतुपर्णका नलसे अश्वविद्या सीखकर अयोध्या जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स च तं क्षमयामास हेतुभिर्बुद्धिसम्मित:।
स सत्कृतो महीपालो नैषधं विस्मितानन:॥ १०॥
उवाच वाक्यं तत्त्वज्ञो नैषधं वदतां वर:।
अनुवाद
बुद्धिनल ने भी अनेक युक्तियों से उनसे क्षमा मांगी। नल से आदर पाकर श्रेष्ठ वक्ता और दार्शनिक राजा ऋतुपर्ण ने मुस्कुराते हुए कहा- ॥10 1/2॥
Buddhinala also apologized to him through many tricks. After receiving respect from Nala, King Rituparna, the best speaker and philosopher, said with a smile – ॥ 10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥