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mahabharat 3.76.6-7: हे भरतवंशी! अपने पिता और माता की आज्ञा लेकर दमयन्ती ने नल को राजभवन में बुलाया, जहाँ वह स्वयं रहती थी। दमयन्ती को अचानक अपने सम्मुख उपस्थित देखकर राजा नल शोक और शोक से भर गए और उनके नेत्रों से आँसू बहने लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  3.76.6-7 
सा वै पित्राभ्यनुज्ञाता मात्रा च भरतर्षभ।
नलं प्रवेशयामास यत्र तस्या: प्रतिश्रय:॥ ६॥
तां स्म दृष्ट्वैव सहसा दमयन्तीं नलो नृप:।
आविष्ट: शोकदु:खाभ्यां बभूवाश्रुपरिप्लुत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंशी! अपने पिता और माता की आज्ञा लेकर दमयन्ती ने नल को राजभवन में बुलाया, जहाँ वह स्वयं रहती थी। दमयन्ती को अचानक अपने सम्मुख उपस्थित देखकर राजा नल शोक और शोक से भर गए और उनके नेत्रों से आँसू बहने लगे।
 
O jewel of the Bharata clan! Taking the permission of her father and mother, Damayanti called Nala inside the royal palace where she herself lived. Seeing Damayanti suddenly present in front of him, King Nala was filled with grief and sorrow and tears started flowing from his eyes. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)