श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.76.53 
सैवं समेत्य व्यपनीय तन्द्रां
शान्तज्वरा हर्षविवृद्धसत्त्वा।
रराज भैमी समवाप्तकामा
शीतांशुना रात्रिरिवोदितेन॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जैसे चन्द्रोदय रात्रि की शोभा बढ़ाता है, वैसे ही भीमपुत्री दमयन्ती अपने पति से मिलकर आलस्य त्यागकर, समस्त मनोरथों को पूर्ण करके, चिन्तारहित, प्रसन्नचित्त होकर अत्यन्त सुन्दर हो गई ॥ 53॥
 
Just as the moon-rise enhances the beauty of the night, so Bhima's daughter Damayanti, after meeting her husband, abandoning her laziness, became extremely beautiful, being free of worries and with a joyful heart, having accomplished all her desires. ॥ 53॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि नलदमयन्तीसमागमे षट्सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें नलदमयन्तीसमागमविषयक छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)