श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.76.45 
तत: स्वोरसि विन्यस्य वक्त्रं तस्य शुभानना।
परीता तेन दु:खेन नि:शश्वासायतेक्षणा॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तब सुन्दर मुख और विशाल नेत्रों वाली दमयन्ती ने नल का मुख अपनी छाती पर रखकर दुःख से व्याकुल होकर गहरी साँसें लेनी आरम्भ कर दीं।
 
Thereupon Damayanti, of beautiful countenance and large eyes, placing Nala's face on her bosom, began to draw deep breaths, distraught with grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)