श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.76.44 
भैमीमपि नलो राजा भ्राजमानो यथा पुरा।
सस्वजे स्वसुतौ चापि यथावत् प्रत्यनन्दत॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
राजा नल का रूप पहले जैसा चमक रहा था। उन्होंने भी दमयन्ती को गले लगा लिया और अपने दोनों बालकों पर प्रेम और स्नेह की वर्षा करके उन्हें प्रसन्न किया।
 
King Nala's form was shining as before. He too embraced Damayanti and made his two children happy by showering love and affection on them. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)