श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.76.42 
ततस्तद् वस्त्रमजरं प्रावृणोद् वसुधाधिप:।
संस्मृत्य नागराजं तं ततो लेभे स्वकं वपु:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सर्पराज ने राजा कर्कोटक का स्मरण करके उनके द्वारा दिए गए बिना धुले वस्त्र धारण कर लिए और अपने पूर्व रूप को पुनः प्राप्त कर लिया ॥ 42॥
 
Thereafter the king of the snakes remembered King Karkotaka and wore the unwashed clothes given by him. With that he regained his previous form. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)