vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन
»
श्लोक 31
श्लोक
3.76.31
स्पृशेयं तेन सत्येन पादावेतौ महीपते।
यथा नासत्कृतं किंचिन्मनसापि चराम्यहम्॥ ३१॥
अनुवाद
हे राजन! मैंने मन में भी कभी कोई पाप नहीं किया है और मैं इस सत्य की शपथ लेकर आपके इन दोनों चरणों का स्पर्श करता हूँ॥31॥
O King! I have never committed any wrong even in my mind and I swear by this truth that I touch these two feet of yours.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×