Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.76.26: दमयंती ने कहा, "हे शुभ निसाधनों के राजा! आपको मुझ पर आक्षेप नहीं करना चाहिए और मेरे चरित्र पर संदेह नहीं करना चाहिए। मैंने देवताओं के ऊपर आपको चुना है (आपके प्रति मेरे निःस्वार्थ प्रेम के कारण)।" | mahabharat अध्याय 3.76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दमयन्त्युवाच
न मामर्हसि कल्याण दोषेण परिशङ्कितुम्।
मया हि देवानुत्सृज्य वृतस्त्वं निषधाधिप॥ २६॥
अनुवाद
दमयंती ने कहा, "हे शुभ निसाधनों के राजा! आपको मुझ पर आक्षेप नहीं करना चाहिए और मेरे चरित्र पर संदेह नहीं करना चाहिए। मैंने देवताओं के ऊपर आपको चुना है (आपके प्रति मेरे निःस्वार्थ प्रेम के कारण)।"
Damayanti said, "O auspicious king of the Nisadhanas! You should not cast aspersions on me and doubt my character. I have chosen you over the gods (because of my unconditional love for you)."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥