श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.76.22 
कथं नु नारी भर्तारमनुरक्तमनुव्रतम्।
उत्सृज्य वरयेदन्यं यथा त्वं भीरु कर्हिचित्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'अश्रुपूर्ण! कोई भी स्त्री अपने प्रिय एवं समर्पित पति को छोड़कर दूसरा विवाह कैसे कर सकती है? जैसा कि तुम करने जा रही हो॥ 22॥
 
'Tearful! How can any woman ever leave her loving and devoted husband and marry another man? As you are going to do.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)