श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.76.20 
मम च व्यवसायेन तपसा चैव निर्जित:।
दु:खस्यान्तेन चानेन भवितव्यं हि नौ शुभे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'शुभ! कलियुग मेरे व्यापार और तप से पराजित हो गया है। अतः अब हमारे कष्टों का अंत हो जाना चाहिए।॥ 20॥
 
'Shubh! Kali Yuga has been defeated by my business and penance. So now our sufferings should come to an end.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)