श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.76.17 
मम राज्यं प्रणष्टं यन्नाहं तत् कृतवान् स्वयम्।
कलिना तत् कृतं भीरु यच्च त्वामहमत्यजम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भीरु! मेरे राज्य का नाश और तुम्हारा त्याग, यह सब कलियुग का ही कर्म था। मैंने स्वयं कुछ नहीं किया॥17॥
 
'Bhiru! The destruction of my kingdom and the abandonment of you was all due to the handiwork of Kali Yuga. I myself did not do anything.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)