श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.76.13 
साक्षाद् देवानपाहाय वृतो य: स पुरा मया।
अनुव्रतां साभिकामां पुत्रिणीं त्यक्तवान् कथम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
प्रथम स्वयंवर के समय मैंने देवताओं की अपेक्षा इन्हें ही चुना था। मैं इनका अनन्य भक्त हूँ, सदा इनसे प्रेम करता हूँ और मेरा एक पुत्र भी है, फिर भी इन्होंने मुझे कैसे त्याग दिया?॥13॥
 
‘At the time of the first swayamvara, I chose him over the gods themselves. I am his devoted devotee, who always loves him and I have a son, yet how did he abandon me?॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)