Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.76.12: 'मैं नहीं जानती कि बचपन से ही मैंने उन महाराज का क्या अपराध किया था कि वे मुझ असहाय और सोई हुई बालिका को वन में छोड़कर चले गए॥12॥ | mahabharat अध्याय 3.76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किमु तस्य मया बाल्यादपराद्धं महीपते:।
यो मामुत्सृज्य विपिने गतवान्निद्रयार्दिताम्॥ १२॥
अनुवाद
'मैं नहीं जानती कि बचपन से ही मैंने उन महाराज का क्या अपराध किया था कि वे मुझ असहाय और सोई हुई बालिका को वन में छोड़कर चले गए॥12॥
'I do not know what crime I had committed since my childhood to that Maharaja that he left me, a helpless and sleepy girl, in the forest and went away.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥