श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.76.11 
अनागसं प्रियां भार्यां विजने श्रममोहिताम्।
अपहाय तु को गच्छेत् पुण्यश्लोकमृते नलम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा राजा नल के अतिरिक्त और कौन अपनी प्रिय निर्दोष पत्नी को थकान के कारण मूर्छित सोती हुई एकान्त में छोड़ सकता था ? ॥11॥
 
Who other than the virtuous King Nala could have left his beloved innocent wife sleeping unconscious due to fatigue in solitude? ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)