श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.76.10 
पूर्वं दृष्टस्त्वया कश्चिद् धर्मज्ञो नाम बाहुक।
सुप्तामुत्सृज्य विपिने गतो य: पुरुष: स्त्रियम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'बाहुक! क्या तुमने कभी ऐसा धर्मात्मा पुरुष देखा है जो अपनी सोती हुई पत्नी को वन में अकेला छोड़कर चला गया हो?
 
'Bahuka! Have you ever seen a man of Dharma who left his sleeping wife alone in the forest and went away?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)