श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.76.1 
बृहदश्व उवाच
सर्वं विकारं दृष्ट्वा तु पुण्यश्लोकस्य धीमत:।
आगत्य केशिनी सर्वं दमयन्त्यै न्यवेदयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
बृहदश्व मुनि कहते हैं- युधिष्ठिर! परम बुद्धिमान पुण्यात्मा राजा नल का सब क्लेश देखकर केशिनी ने आकर दमयन्ती से कहा॥1॥
 
Brihadashva Muni says- Yudhishthir! Seeing all the troubles of the most intelligent virtuous king Nala, Keshini came and told Damayanti. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)