Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.75.9: वह छोटे से छोटे द्वार पर पहुँचकर भी नहीं झुकता, उसे देखते ही द्वार स्वयं ही सहज ही इस प्रकार ऊँचा हो जाता है कि सिर उससे छूता ही नहीं।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.75.9 
ह्रस्वमासाद्य संचारं नासौ विनमते क्वचित्।
तं तु दृष्ट्वा यथाऽसंगमुत्सर्पति यथासुखम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वह छोटे से छोटे द्वार पर पहुँचकर भी नहीं झुकता, उसे देखते ही द्वार स्वयं ही सहज ही इस प्रकार ऊँचा हो जाता है कि सिर उससे छूता ही नहीं।॥9॥
 
He does not bend even on reaching the smallest door. On seeing him, the door itself easily becomes elevated in such a way that the head does not touch it.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)