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mahabharat 3.75.4: 'केशिनी! वह आग्रह करे तो भी उसे अग्नि मत दो और वह शीघ्रता से मांगे तो भी उसे जल मत दो।   |   mahabharat अध्याय 3.75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.75.4 
न चास्य प्रतिबन्धेन देयोऽग्निरपि केशिनि।
याचते न जलं देयं सर्वथा त्वरमाणया॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'केशिनी! वह आग्रह करे तो भी उसे अग्नि मत दो और वह शीघ्रता से मांगे तो भी उसे जल मत दो।
 
'Keshini! Do not give him fire even if he insists and do not give him water even if he asks for it in a hurry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)