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mahabharat 3.75.27: 'भद्रे! ये दोनों बालक मेरे पुत्र-पुत्री के समान हैं, इसीलिए इन्हें देखते ही मेरे नेत्रों से सहसा आँसू बहने लगे॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.75.27 
इदं च सदृशं भद्रे मिथुनं मम पुत्रयो:।
अतो दृष्ट्वैव सहसा बाष्पमुत्सृष्टवानहम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'भद्रे! ये दोनों बालक मेरे पुत्र-पुत्री के समान हैं, इसीलिए इन्हें देखते ही मेरे नेत्रों से सहसा आँसू बहने लगे॥ 27॥
 
'Bhadre! These two boys are like my son and daughter, that is why on seeing them suddenly tears started flowing from my eyes.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)