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mahabharat 3.75.2: 'केशिनी! पुनः जाओ और बाहुक की परीक्षा लो। इस बार तुम कुछ मत कहना। निकट रहकर उसके चरित्र पर दृष्टि रखना।॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.75.2 
गच्छ केशिनि भूयस्त्वं परीक्षां कुरु बाहुके।
अब्रुवाणा समीपस्था चरितान्यस्य लक्षय॥ २॥
 
 
अनुवाद
'केशिनी! पुनः जाओ और बाहुक की परीक्षा लो। इस बार तुम कुछ मत कहना। निकट रहकर उसके चरित्र पर दृष्टि रखना।॥ 2॥
 
'Keshini! Go again and test Bahuka. This time you don't say anything. Stay close and keep an eye on his character.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)