Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.75.19-21: उसके प्रयत्नों से उसे इस बात का बड़ा संदेह हो गया कि बाहुक उसका पति है। तब वह रोते हुए केशिनी से मधुर वाणी में बोली, "सखी! एक बार फिर जाओ और जब बाहुक असावधान हो, तो जल्दी से रसोई से उसके द्वारा विशेष विधि से उबालकर तैयार किए गए फलों का गूदा ले आओ।" केशिनी दमयंती की प्रिय सखी थी। वह तुरन्त गई और जब बाहुक का ध्यान भंग हुआ, तो फलों के गरम गूदे में से कुछ निकालकर तुरन्त ले आई। | mahabharat अध्याय 3.75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसके प्रयत्नों से उसे इस बात का बड़ा संदेह हो गया कि बाहुक उसका पति है। तब वह रोते हुए केशिनी से मधुर वाणी में बोली, "सखी! एक बार फिर जाओ और जब बाहुक असावधान हो, तो जल्दी से रसोई से उसके द्वारा विशेष विधि से उबालकर तैयार किए गए फलों का गूदा ले आओ।" केशिनी दमयंती की प्रिय सखी थी। वह तुरन्त गई और जब बाहुक का ध्यान भंग हुआ, तो फलों के गरम गूदे में से कुछ निकालकर तुरन्त ले आई।
Through her efforts, she became very suspicious that Bahuk was her husband. Then she started crying and said to Keshini in a sweet voice, "Friend! Go once again and when Bahuk is careless, quickly bring the pulp of the fruits prepared by him by boiling them in a special way from the kitchen." Keshini was Damayanti's beloved friend. She went immediately and when Bahuk's attention was diverted, she took out some of the hot pulp of the fruits and brought it immediately.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥