Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.75.16-17: मैंने उनमें एक और बहुत ही आश्चर्यजनक बात देखी है। वे फूल लेते और उन्हें अपने हाथों से धीरे से मसल देते। हाथों से मसलने पर भी फूल विकृत नहीं होते थे, बल्कि और भी सुगंधित हो जाते थे और बड़े हो जाते थे। इन्हीं अद्भुत लक्षणों को देखकर मैं झटपट यहाँ आ गया हूँ। 16-17 | mahabharat अध्याय 3.75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैंने उनमें एक और बहुत ही आश्चर्यजनक बात देखी है। वे फूल लेते और उन्हें अपने हाथों से धीरे से मसल देते। हाथों से मसलने पर भी फूल विकृत नहीं होते थे, बल्कि और भी सुगंधित हो जाते थे और बड़े हो जाते थे। इन्हीं अद्भुत लक्षणों को देखकर मैं झटपट यहाँ आ गया हूँ। 16-17
I have seen another very surprising thing in him. He used to take flowers and crush them gently with his hands. Even after crushing with hands, the flowers did not get deformed but became more fragrant and grew. Seeing these amazing signs, I have come here in a hurry. 16-17.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥