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mahabharat 3.75.14: इस अद्भुत वस्तु को देखकर मैं आश्चर्यचकित होकर यहाँ आया हूँ। बाहुक में मैंने एक और इससे भी अधिक आश्चर्यजनक वस्तु देखी है।   |   mahabharat अध्याय 3.75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.75.14 
तदद्‍भुततमं दृष्ट्वा विस्मिताहमिहागता।
अन्यच्च तस्मिन् सुमहदाश्चर्यं लक्षितं मया॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इस अद्भुत वस्तु को देखकर मैं आश्चर्यचकित होकर यहाँ आया हूँ। बाहुक में मैंने एक और इससे भी अधिक आश्चर्यजनक वस्तु देखी है।
 
Having seen this extraordinary thing, I have come here in amazement. I have seen another even more astonishing thing in Bahuka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)