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mahabharat 3.75.12-13: परन्तु बाहुक के देखते ही देखते वे सभी बर्तन जल से भर गए। बाहुक ने उससे भोजन की सामग्री धोकर चूल्हे पर रख दी। फिर मुट्ठी भर तिनके लेकर सूर्य की किरणों से उसे जलाया। तब देखते ही देखते उसमें अग्नि जलने लगी॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 3.75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  3.75.12-13 
ते तेनावेक्षिता: कुम्भा: पूर्णा एवाभवंस्तत:।
तत: प्रक्षालनं कृत्वा समधिश्रित्य बाहुक:॥ १२॥
तृणमुष्टिं समादाय सवितुस्तं समादधत्।
अथ प्रज्वलितस्तत्र सहसा हव्यवाहन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
परन्तु बाहुक के देखते ही देखते वे सभी बर्तन जल से भर गए। बाहुक ने उससे भोजन की सामग्री धोकर चूल्हे पर रख दी। फिर मुट्ठी भर तिनके लेकर सूर्य की किरणों से उसे जलाया। तब देखते ही देखते उसमें अग्नि जलने लगी॥12-13॥
 
But as soon as Bahuk saw, all those pots got filled with water. Bahuk washed the food items with it and put it on the stove. Then taking a handful of straw, he lit it with the rays of the sun. Then suddenly, in no time, fire started burning in it.॥12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)