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mahabharat 3.75.1: महर्षि बृहदश्व कहते हैं- युधिष्ठिर! यह सब सुनकर दमयन्ती अत्यन्त दुःखी हुई। उसने मन ही मन यह सन्देह किया कि बाहुक ही नल है और वह केशिनी से इस प्रकार बोली-॥1॥   |   mahabharat अध्याय 3.75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.75.1 
बृहदश्व उवाच
दमयन्ती तु तच्छ्रुत्वा भृशं शोकपरायणा।
शङ्कमाना नलं तं वै केशिनीमिदमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व कहते हैं- युधिष्ठिर! यह सब सुनकर दमयन्ती अत्यन्त दुःखी हुई। उसने मन ही मन यह सन्देह किया कि बाहुक ही नल है और वह केशिनी से इस प्रकार बोली-॥1॥
 
Sage Brihadashwa says- Yudhishthira! On hearing all this Damayanti became very sad. She definitely suspected in her heart that Bahuka was Nala and she spoke to Keshini in this manner-॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)