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mahabharat 3.74.16: केवल सर्वशक्तिमान भगवान ही नल को जानते हैं और उनकी अंतरात्मा ही उन्हें जानती है, अन्य कोई नहीं; क्योंकि राजा नल कभी भी अपने लक्षण या लक्षण किसी को नहीं बताते ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.74: बाहुक-केशिनी-संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 74: बाहुक-केशिनी-संवाद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.74.16 
आत्मैव तु नलं वेद या चास्य तदनन्तरा।
न हि वै स्वानि लिङ्गानि नल: शंसति कर्हिचित्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
केवल सर्वशक्तिमान भगवान ही नल को जानते हैं और उनकी अंतरात्मा ही उन्हें जानती है, अन्य कोई नहीं; क्योंकि राजा नल कभी भी अपने लक्षण या लक्षण किसी को नहीं बताते ॥16॥
 
Only the Almighty God knows Nala and his inner soul knows him, no one else; because King Nala never reveals his characteristics or signs to others. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)