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mahabharat 3.74.15: यशस्विनी! नल को कोई दूसरा नहीं जानता। राजा नल का प्रथम रूप अदृश्य हो गया है। वे इस संसार में गुप्त रूप से विचरण करते हैं।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.74: बाहुक-केशिनी-संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 74: बाहुक-केशिनी-संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.74.15 
न चान्य: पुरुष: कश्चिन्नलं वेत्ति यशस्विनि।
गूढश्चरति लोकेऽस्मिन्नष्टरूपे महीपति:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यशस्विनी! नल को कोई दूसरा नहीं जानता। राजा नल का प्रथम रूप अदृश्य हो गया है। वे इस संसार में गुप्त रूप से विचरण करते हैं।॥15॥
 
Yashaswini! No other person knows Nala. The first form of King Nala has become invisible. He moves around in this world in mystery. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)