श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.73.9 
अद्य चन्द्राभवक्त्रं तं न पश्यामि नलं यदि।
असंख्येयगुणं वीरं विनङ्क्षॺामि न संशय:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
आज यदि मैं असंख्य गुणों से सुशोभित और चन्द्रमा के समान मुख वाले वीर नल को न देखूँ तो अपने प्राण त्याग दूँ, इसमें संशय नहीं है॥9॥
 
Today, if I do not see the brave Nala, adorned with innumerable qualities and having a face like the moon, then I will end my life, there is no doubt about it. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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