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mahabharat 3.73.4: दमयन्ती ने भी नल के रथ की गड़गड़ाहट सुनी, मानो वर्षा ऋतु में गरजते हुए बादल जोर-जोर से शोर कर रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 3.73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.73.4 
दमयन्ती तु शुश्राव रथघोषं नलस्य तम्।
यथा मेघस्य नदतो गम्भीरं जलदागमे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
दमयन्ती ने भी नल के रथ की गड़गड़ाहट सुनी, मानो वर्षा ऋतु में गरजते हुए बादल जोर-जोर से शोर कर रहे हों।
 
Damayanti too heard the rumbling sound of Nala's chariot, as if the thundering clouds were making a loud noise during the rainy season.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)