Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.73.32-33: दमयन्ती भी शोक से विह्वल होकर राजा ऋतुपर्ण, सारथिपुत्र वार्ष्णेय तथा पूर्वोक्त बाहुक की ओर देखकर सोचने लगी - 'यह किसके रथ की घरघराहट सुनाई दे रही है? | mahabharat अध्याय 3.73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दमयन्त्यपि शोकार्ता दृष्ट्वा भाङ्गासुरिं नृपम्॥ ३२॥
सूतपुत्रं च वार्ष्णेयं बाहुकं च तथाविधम्।
चिन्तयामास वैदर्भी कस्यैष रथनि:स्वन:॥ ३३॥
अनुवाद
दमयन्ती भी शोक से विह्वल होकर राजा ऋतुपर्ण, सारथिपुत्र वार्ष्णेय तथा पूर्वोक्त बाहुक की ओर देखकर सोचने लगी - 'यह किसके रथ की घरघराहट सुनाई दे रही है?
Damayanti too, overwhelmed with grief, looking at King Rituparna, the charioteer's son Varshneya and the aforementioned Bahuka, began to wonder - 'Whose chariot's rumbling sound was it that was heard?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥