दमयन्त्यपि शोकार्ता दृष्ट्वा भाङ्गासुरिं नृपम्॥ ३२॥
सूतपुत्रं च वार्ष्णेयं बाहुकं च तथाविधम्।
चिन्तयामास वैदर्भी कस्यैष रथनि:स्वन:॥ ३३॥
अनुवाद
दमयन्ती भी शोक से विह्वल होकर राजा ऋतुपर्ण, सारथिपुत्र वार्ष्णेय तथा पूर्वोक्त बाहुक की ओर देखकर सोचने लगी - 'यह किसके रथ की घरघराहट सुनाई दे रही है?
Damayanti too, overwhelmed with grief, looking at King Rituparna, the charioteer's son Varshneya and the aforementioned Bahuka, began to wonder - 'Whose chariot's rumbling sound was it that was heard?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)