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mahabharat 3.73.28: ‘ठीक है, जो भी कारण हो, मैं बाद में पता लगाऊँगा। जो कारण वह बता रहा है, वही उसके आने का एकमात्र कारण नहीं है।’ ऐसा सोचकर राजा ने उसे आदरपूर्वक विश्राम के लिए विदा कर दिया॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 3.73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.73.28 
पश्चादुदर्के ज्ञास्यामि कारणं यद् भविष्यति।
नैतदेवं स नृपतिस्तं सत्कृत्य व्यसर्जयत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘ठीक है, जो भी कारण हो, मैं बाद में पता लगाऊँगा। जो कारण वह बता रहा है, वही उसके आने का एकमात्र कारण नहीं है।’ ऐसा सोचकर राजा ने उसे आदरपूर्वक विश्राम के लिए विदा कर दिया॥ 28॥
 
'Okay, whatever the reason is, I will find out later. The reasons he is giving are not the only reason for his visit.' Thinking so, the king respectfully sent him off to rest.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)