Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.73.26-27: यह सुनकर राजा भीम मुस्कुराए और मन ही मन सोचने लगे, 'वे अनेक गाँव पार करके सौ योजन से भी अधिक दूर आ गए हैं, फिर भी उन्होंने मुझसे कहा है कि यह कार्य बहुत सरल है। फिर उनके आने का कारण क्या है, यह मैं ठीक से नहीं जान पाया।' | mahabharat अध्याय 3.73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह सुनकर राजा भीम मुस्कुराए और मन ही मन सोचने लगे, 'वे अनेक गाँव पार करके सौ योजन से भी अधिक दूर आ गए हैं, फिर भी उन्होंने मुझसे कहा है कि यह कार्य बहुत सरल है। फिर उनके आने का कारण क्या है, यह मैं ठीक से नहीं जान पाया।'
Hearing this, King Bhima smiled and thought to himself, 'He has crossed many villages and has come more than a hundred yojanas away, but he has told me that the task is very simple. Then what is the reason for his arrival, I could not know it properly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥