श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  3.73.21-22h 
स तत्र कुण्डिने रम्ये वसमानो महीपति:।
न च किंचित् तदापश्यत् प्रेक्षमाणो मुहुर्मुहु:।
स तु राज्ञा समागम्य विदर्भपतिना तदा॥ २१॥
अकस्मात् सहसा प्राप्तं स्त्रीमन्त्रं न स्म विन्दति।
 
 
अनुवाद
भूपाल सुन्दर एवं मनोहर कुण्डिनपुर में रहने लगे। बार-बार देखने पर भी वहाँ (स्वयंवर जैसी) कोई वस्तु दिखाई नहीं दी। विदर्भ के राजा से मिलकर उन्हें एकाएक यह ज्ञान नहीं हुआ कि यह स्त्रियों की गुप्त मंत्रणा मात्र है। 21 1/2॥
 
Bhupal stayed in the beautiful and beautiful Kundinpur. Despite looking at them again and again, nothing (like Swayamvar) was seen there. After meeting the king of Vidarbha, he suddenly did not realize that this was just a secret advice of women. 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)