श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.73.2 
स भीमवचनाद् राजा कुण्डिनं प्राविशत् पुरम्।
नादयन् रथघोषेण सर्वा: स विदिशो दिश:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीम के अनुरोध पर राजा ऋतुपर्ण ने कुण्डिनपुर में प्रवेश किया, उनके रथ की घरघराहट की ध्वनि सब दिशाओं में गूंज रही थी॥ 2॥
 
Upon Bhima's request, King Rituparna entered Kundinapura, with the whirring sound of his chariot echoing in all directions.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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