vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत
»
श्लोक 18
श्लोक
3.73.18
ततोऽवतीर्य वार्ष्णेयो बाहुकश्च रथोत्तमात्।
हयांस्तानवमुच्याथ स्थापयामास वै रथम्॥ १८॥
अनुवाद
तत्पश्चात् वार्ष्णेय और बाहुक उस उत्तम रथ से उतरे, घोड़ों को सुरक्षित रखा और रथ को एक स्थान पर खड़ा कर दिया।
Thereafter Varshneya and Bahuka alighted from that excellent chariot, unharmed the horses and parked the chariot at a place.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×