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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत
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श्लोक 17
श्लोक
3.73.17
ततो मध्यमकक्षायां ददर्श रथमास्थितम्।
ऋतुपर्णं महीपालं सहवार्ष्णेयबाहुकम्॥ १७॥
अनुवाद
वहाँ से उसने देखा कि महाराज ऋतुपर्ण वार्ष्णेय और बाहुक के साथ रथ पर बैठकर मध्य प्रांगण में पहुँच गए हैं॥17॥
From there he saw that Maharaja Rituparna, seated on a chariot along with Varshneya and Bahuka, had reached the middle enclosure.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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