श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.73.10 
यदि वै तस्य वीरस्य बाह्वोर्नाद्याहमन्तरम्।
प्रविशामि सुखस्पर्शं न भविष्याम्यसंशयम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यदि आज मैं उन वीर योद्धा नल की दोनों भुजाओं के मध्य भाग में प्रवेश न कर सकूँ, जिनका स्पर्श अत्यंत सुखदायी है, तो निश्चय ही जीवित न रह सकूँगा॥10॥
 
If today I am not able to enter the middle part of the two arms of that brave warrior Nala, whose touch is extremely pleasant, then I will certainly not be able to survive. ॥10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas