श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.72.8 
सर्व: सर्वं न जानाति सर्वज्ञो नास्ति कश्चन।
नैकत्र परिनिष्ठास्ति ज्ञानस्य पुरुषे क्वचित्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘सभी लोग सब कुछ नहीं जानते। संसार में कोई भी सर्वज्ञ नहीं है और न ही किसी एक व्यक्ति के पास सारा ज्ञान है।॥8॥
 
‘Not all people know all things. No one in the world is omniscient and no one person possesses all the knowledge.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)