Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.72.43: नल के चले जाने पर कलि अपने घर लौट गए। हे राजन! कलि से मुक्त होकर भूमिपाल राजा नल सभी चिंताओं से मुक्त हो गए; परंतु अभी तक उन्हें अपना मूल स्वरूप प्राप्त नहीं हुआ था। केवल उनमें यही कमी थी। 43. | mahabharat अध्याय 3.72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नल के चले जाने पर कलि अपने घर लौट गए। हे राजन! कलि से मुक्त होकर भूमिपाल राजा नल सभी चिंताओं से मुक्त हो गए; परंतु अभी तक उन्हें अपना मूल स्वरूप प्राप्त नहीं हुआ था। केवल उनमें यही कमी थी। 43.
After Nala left, Kali went back to his home. O King! After getting free from Kali, Bhumipal King Nala got rid of all worries; but till now he had not got his original form. Only this was missing in him. 43.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि कलिनिर्गमे द्विसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें कलियुगनिर्गमनविषयक बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥