Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.72.39-40: तत्पश्चात्, जब कलियुग का अन्त हो गया, तब शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले निषधियों के राजा नल समस्त चिंताओं से मुक्त हो गए। बहेड़ा वृक्ष के फल गिनकर वे अत्यन्त प्रसन्न हुए। उन्होंने महान तेज से युक्त तेजस्वी रूप धारण किया, अपने रथ पर सवार हुए और वेगवान घोड़ों को चलाते हुए विदर्भ की ओर प्रस्थान किया। 39-40। | mahabharat अध्याय 3.72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात्, जब कलियुग का अन्त हो गया, तब शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले निषधियों के राजा नल समस्त चिंताओं से मुक्त हो गए। बहेड़ा वृक्ष के फल गिनकर वे अत्यन्त प्रसन्न हुए। उन्होंने महान तेज से युक्त तेजस्वी रूप धारण किया, अपने रथ पर सवार हुए और वेगवान घोड़ों को चलाते हुए विदर्भ की ओर प्रस्थान किया। 39-40।
Thereafter, when Kaliyug disappeared, King Nala, the king of Nishadhans, who killed the enemy warriors, became free from all worries. He was very happy after counting the fruits of the Baheda tree. He assumed a radiant form filled with great radiance, mounted his chariot and driving the fast horses, left for Vidarbha. 39-40.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥