श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.72.32 
ततो विषविमुक्तात्मा स्वं रूपमकरोत् कलि:।
तं शप्तुमैच्छत् कुपितो निषधाधिपतिर्नल:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् विष के प्रभाव से मुक्त होकर कलियुग ने अपना रूप प्रकट किया। उस समय निषधननरेश नल क्रोधित होकर कलियुग को शाप देना चाहते थे ॥32॥
 
Thereafter, after getting free from the effect of poison, Kaliyuga revealed its form. At that time Nishadhanaresh Nala got angry and wanted to curse Kaliyuga. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)