Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.72.30-31: जुए का रहस्य जानकर कलियुग नल के शरीर से बाहर आ गया। तब वह बार-बार अपने मुख से कर्कोटक सर्प का तीखा विष उगल रहा था। उस समय संकट में पड़े कलियुग का श्राप भी दूर हो गया। उसने राजा नल को बहुत समय तक कष्ट दिया था, जिसके कारण वे असमंजस में थे कि क्या करें। 30-31। | mahabharat अध्याय 3.72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्याक्षहृदयज्ञस्य शरीरान्नि:सृत: कलि:।
कर्कोटकविषं तीक्ष्णं मुखात् सततमुद्वमन्॥ ३०॥
कलेस्तस्य तदार्तस्य शापाग्नि: स विनि:सृत:।
स तेन कर्शितो राजा दीर्घकालमनात्मवान्॥ ३१॥
अनुवाद
जुए का रहस्य जानकर कलियुग नल के शरीर से बाहर आ गया। तब वह बार-बार अपने मुख से कर्कोटक सर्प का तीखा विष उगल रहा था। उस समय संकट में पड़े कलियुग का श्राप भी दूर हो गया। उसने राजा नल को बहुत समय तक कष्ट दिया था, जिसके कारण वे असमंजस में थे कि क्या करें। 30-31।
After knowing the secret of gambling, Kaliyug came out of Nala's body. Then he was repeatedly spitting out the sharp poison of Karkotaka snake from his mouth. At that time, the curse of Kaliyug who was in trouble also went away. He had troubled King Nala for a long time and due to that he was confused about what to do. 30-31.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥