Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.72.3-4: उस समय जब वस्त्र गिर गया, तब उस महामनस्वी राजा ने बड़ी उतावली से नल से कहा - 'महामते! इन वेगवान घोड़ों को (थोड़ी देर के लिए) रोक लीजिए। मैं अपना गिरा हुआ वस्त्र ले आता हूँ। जब तक यह वार्ष्णेय नीचे आकर मेरा ऊपर का वस्त्र न ले आए, तब तक रथ को रोके रखिए।'॥3-4॥ | mahabharat अध्याय 3.72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स त्वरमाणस्तु पटे निपतिते तदा।
ग्रहीष्यामीति तं राजा नलमाह महामना:॥ ३॥
निगृह्णीष्व महाबुद्धे हयानेतान् महाजवान्।
वार्ष्णेयो यावदेनं मे पटमानयतामिह॥ ४॥
अनुवाद
उस समय जब वस्त्र गिर गया, तब उस महामनस्वी राजा ने बड़ी उतावली से नल से कहा - 'महामते! इन वेगवान घोड़ों को (थोड़ी देर के लिए) रोक लीजिए। मैं अपना गिरा हुआ वस्त्र ले आता हूँ। जब तक यह वार्ष्णेय नीचे आकर मेरा ऊपर का वस्त्र न ले आए, तब तक रथ को रोके रखिए।'॥3-4॥
At that time, when the cloth fell, that great-minded king said to Nala in great haste - 'Mahamate! Stop these fast horses (for a while). I will bring my fallen cloth. Till this Varshneya comes down and brings my upper cloth, keep the chariot stopped.'॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥