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mahabharat 3.72.25-26: ‘हे राजन! मैंने आपमें गणित की यह अद्भुत शक्ति देखी है। हे राजन! मैं वह कला सुनना चाहता हूँ जिससे यह गिनती सीखी जाती है।’ राजा तुरन्त जाने के लिए उत्सुक थे, अतः उन्होंने बाहुक से कहा - ‘मुझे द्यूत-विद्या में निपुण और गणित में अत्यंत निपुण समझो।’॥ 25-26॥   |   mahabharat अध्याय 3.72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  3.72.25-26 
अत्यद्‍भुतमिदं राजन् दृष्टवानस्मि ते बलम्।
श्रोतुमिच्छामि तां विद्यां ययैतज्ज्ञायते नृप॥ २५॥
तमुवाच ततो राजा त्वरितो गमने नृप।
विद्धॺक्षहृदयज्ञं मां संख्याने च विशारदम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘हे राजन! मैंने आपमें गणित की यह अद्भुत शक्ति देखी है। हे राजन! मैं वह कला सुनना चाहता हूँ जिससे यह गिनती सीखी जाती है।’ राजा तुरन्त जाने के लिए उत्सुक थे, अतः उन्होंने बाहुक से कहा - ‘मुझे द्यूत-विद्या में निपुण और गणित में अत्यंत निपुण समझो।’॥ 25-26॥
 
‘O King! I have seen this wonderful power of mathematics in you. O king! I want to hear the art by which this counting is learnt.’ The king was eager to go immediately, so he said to Bahuka – ‘Consider me an expert in the art of gambling and extremely proficient in mathematics.’॥ 25-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)