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mahabharat 3.72.2: जब रथ तीव्र गति से दौड़ रहा था, तब शत्रु नगरों के विजेता राजा ऋतुपर्ण ने देखा कि उनका ऊपरी वस्त्र नीचे गिर गया है।   |   mahabharat अध्याय 3.72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.72.2 
तथा प्रयाते तु रथे तदा भाङ्गासुरिर्नृप:।
उत्तरीयमधोऽपश्यद् भ्रष्टं परपुरंजय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
जब रथ तीव्र गति से दौड़ रहा था, तब शत्रु नगरों के विजेता राजा ऋतुपर्ण ने देखा कि उनका ऊपरी वस्त्र नीचे गिर गया है।
 
While the chariot was running at this rapid speed, King Rituparna, the conqueror of enemy cities, saw that his upper garment had fallen down. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)