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mahabharat 3.72.19: 'घोड़ों का रहस्य जानने वाले बाहुक! मैं आपके ही प्रयत्न से विदर्भ की राजधानी तक पहुँचना चाहता हूँ। देखो, मैं आपकी शरण में आया हूँ। इस कार्य में आप कोई विघ्न न डालें॥ 19॥   |   mahabharat अध्याय 3.72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.72.19 
त्वत्कृते यातुमिच्छामि विदर्भान् हयकोविद।
शरणं त्वां प्रपन्नोऽस्मि न विघ्नं कर्तुमर्हसि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'घोड़ों का रहस्य जानने वाले बाहुक! मैं आपके ही प्रयत्न से विदर्भ की राजधानी तक पहुँचना चाहता हूँ। देखो, मैं आपकी शरण में आया हूँ। इस कार्य में आप कोई विघ्न न डालें॥ 19॥
 
'Bahuka, who knows the secret of horses! I want to reach the capital of Vidarbha with your efforts only. Look, I have come to your refuge. Do not create any hindrance in this task.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)