Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.72.12-14: यह सुनकर बाहुक ने रथ रोककर राजा से कहा - 'राजा शत्रुसूदन! आप जो कह रहे हैं, वह अप्रत्यक्ष संख्या है। मैं इस बहेड़े के वृक्ष को काटकर इसके फलों की संख्या प्रत्यक्ष कर दूँगा। महाराज! मैं आपकी आँखों के सामने इस बहेड़े के वृक्ष को काटूँगा। इस प्रकार गिनने से वह संख्या अप्रत्यक्ष नहीं रहेगी। ऐसा किए बिना मैं यह नहीं समझ सकता कि (फलों की) संख्या इतनी है या नहीं।' 12-14। | mahabharat अध्याय 3.72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो रथमवस्थाप्य राजानं बाहुकोऽब्रवीत्।
परोक्षमिव मे राजन् कत्थसे शत्रुकर्शन॥ १२॥
प्रत्यक्षमेतत् कर्तास्मि शातयित्वा बिभीतकम्।
अथात्र गणिते राजन् विद्यते न परोक्षता॥ १३॥
प्रत्यक्षं ते महाराज शातयिष्ये बिभीतकम्।
अहं हि नाभिजानामि भवेदेवं न वेति वा॥ १४॥
अनुवाद
यह सुनकर बाहुक ने रथ रोककर राजा से कहा - 'राजा शत्रुसूदन! आप जो कह रहे हैं, वह अप्रत्यक्ष संख्या है। मैं इस बहेड़े के वृक्ष को काटकर इसके फलों की संख्या प्रत्यक्ष कर दूँगा। महाराज! मैं आपकी आँखों के सामने इस बहेड़े के वृक्ष को काटूँगा। इस प्रकार गिनने से वह संख्या अप्रत्यक्ष नहीं रहेगी। ऐसा किए बिना मैं यह नहीं समझ सकता कि (फलों की) संख्या इतनी है या नहीं।' 12-14।
Hearing this, Bahuka stopped the chariot and said to the king - 'King Shatrusudan! What you are saying is an indirect number. I will cut this baheda tree and make the number of its fruits visible. Maharaj! I will cut this baheda tree in front of your eyes. By counting in this way, that number will no longer be indirect. Without doing this, I cannot understand whether the number (of fruits) is this much or not. 12-14.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥