Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.72.1: महर्षि बृहदश्व बोले: युधिष्ठिर! जैसे पक्षी आकाश में उड़ता है, उसी प्रकार बाहुक भी बहुत सी नदियों, पर्वतों, वनों और सरोवरों को पार करता हुआ (अत्यंत वेग से) आगे बढ़ने लगा। | mahabharat अध्याय 3.72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बृहदश्व उवाच
स नदी: पर्वतांश्चैव वनानि च सरांसि च।
अचिरेणातिचक्राम खेचर: खे चरन्निव॥ १॥
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व बोले: युधिष्ठिर! जैसे पक्षी आकाश में उड़ता है, उसी प्रकार बाहुक भी बहुत सी नदियों, पर्वतों, वनों और सरोवरों को पार करता हुआ (अत्यंत वेग से) आगे बढ़ने लगा।
Sage Brihadashwa said: Yudhishthira! Just like a bird flies in the sky, in the same manner Bahuka started moving ahead (with great speed) quickly crossing many rivers, mountains, forests and lakes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥