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mahabharat 3.71.8: ‘इसमें कितना सत्य या असत्य है - यह तो मैं वहाँ जाकर ही निश्चित रूप से जान सकूँगा, अतः मैं अपने लिए ॥8� ...   |   mahabharat अध्याय 3.71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.71.8 
यदत्र सत्यं वासत्यं गत्वा वेत्स्यामि निश्चयम्।
ऋतुपर्णस्य वै काममात्मार्थं च करोम्यहम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘इसमें कितना सत्य या असत्य है - यह तो मैं वहाँ जाकर ही निश्चित रूप से जान सकूँगा, अतः मैं अपने लिए ॥8� ...
 
'How much truth or falsehood is there in this - I will be able to know it for sure only after going there, therefore I will fulfill this wish of Rituparna for myself.' ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)