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mahabharat 3.71.7: 'क्योंकि वो पतली कमर वाली लड़की मेरे दुःख से बहुत परेशान हुई होगी और उसने ऐसा इसलिए सोचा होगा क्योंकि उसे मुझसे मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन मेरा दिल कहता है कि वो ऐसा कभी नहीं कर सकती। खासकर उसके तो बच्चे हैं। इसलिए उससे ऐसी उम्मीदें नहीं की जा सकतीं।'   |   mahabharat अध्याय 3.71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.71.7 
मम शोकेन संविग्ना नैराश्यात् तनुमध्यमा।
नैवं सा कर्हिचित् कुर्यात् सापत्या च विशेषत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'क्योंकि वो पतली कमर वाली लड़की मेरे दुःख से बहुत परेशान हुई होगी और उसने ऐसा इसलिए सोचा होगा क्योंकि उसे मुझसे मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी, लेकिन मेरा दिल कहता है कि वो ऐसा कभी नहीं कर सकती। खासकर उसके तो बच्चे हैं। इसलिए उससे ऐसी उम्मीदें नहीं की जा सकतीं।'
 
'Because that thin-waisted girl must have been very upset by my grief and she must have thought like this because she had no hope of meeting me, but my heart says that she can never do this. Especially she has children. That is why such expectations cannot be made from her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)